परमेश्वर का उद्धार और प्रबन्ध

निर्गमन 12:31–36
“तब फ़िरौन ने रात ही में मूसा और हारून को बुलवाकर कहा, उठो, मेरी प्रजा में से निकल जाओ, तुम और इस्राएली; जाकर यहोवा की उपासना करो जैसा तुमने कहा था… और उसने कहा, मुझे भी आशीष दो।”

फ़िरौन आशीष माँगता है

वही फ़िरौन जिसने कभी परमेश्वर का विरोध किया था, अब दीन होकर स्वीकार करता है कि इस्राएल का परमेश्वर उससे बड़ा है।

उसका टूटना हमें दिखाता है कि हर घुटना यहोवा के सामने झुकेगा — कुछ स्वेच्छा से, कुछ नम्र होकर।

हमें जीवन के संकटों की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए परमेश्वर की महानता स्वीकार करने के लिये। धन्य है वह जो अभी समर्पण में झुकता है, न कि बाद में पछतावे में।

इस्राएलियों ने मिस्रियों को लूटा

जब इस्राएली निकले, तब मिस्रियों ने उन्हें चाँदी, सोना और वस्त्र दिए। परमेश्वर ने दासता करनेवालों की सम्पत्ति को अपनी प्रजा के लिये प्रबन्ध में बदल दिया।

• यह अब्राहम और मूसा से की गई प्रतिज्ञा की पूर्ति थी कि उसकी प्रजा खाली हाथ नहीं जाएगी।

• जिन्होंने इस्राएल को बाँधा था, वही अब उनकी यात्रा के लिये साधन दे रहे थे।

🔑 हमारे लिये शिक्षा:

जब परमेश्वर छुड़ाता है, वह केवल मुक्त नहीं करता, बल्कि सुसज्जित भी करता है। वह हृदयों, परिस्थितियों और यहाँ तक कि शत्रुओं को भी अपनी सन्तानों के लिये प्रबन्ध करने को बदल सकता है।

इस्राएल मिस्र से स्वतंत्र, आशीषित और प्रबन्धित होकर निकला — जैसा परमेश्वर ने कहा था। मसीह में हम भी पाप से मुक्त किए गए हैं, दूसरों को आशीष देने को बुलाए गए हैं, और अपनी आत्मिक यात्रा के लिये सब कुछ पाकर चलते हैं।

🙏 प्रार्थना:

“हे प्रभु, मुझे नम्रता से तेरे सामने झुकना सिखा और मेरे जीवन के लिये तेरे प्रबन्ध पर भरोसा करना सिखा। मुझे तेरे उद्धार की स्वतंत्रता और आशीष में चलने दे। आमीन।”