जब अन्य पीछे हटते हैं, तब निकट आना: परमेश्वर की पवित्र उपस्थिति में प्रवेश करने का साहस

📖 ✝️ पवित्रशास्त्र पाठ : निर्गमन 20:21

“और वे लोग दूर ही खड़े रहे परन्तु मूसा उस घोर अन्धकार के समीप गया जहाँ परमेश्‍वर था।”
‭‭निर्गमन‬ ‭20‬:‭21‬ ‭HINOVBSI‬‬

जो मनुष्य परमेश्वर से सबसे अधिक डरता है, वही उसके निकट आने से सबसे कम डरता है।

— ए. डब्ल्यू. टोज़र

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24 मई, 1738 की संध्या को, जॉन वेस्ली—एक ऐंग्लिकन याजक—लंदन की एल्डर्सगेट स्ट्रीट की एक छोटी सभा में अनिच्छा से गया। यद्यपि वह एक पादरी और मिशनरी था, फिर भी उसका आत्मिक जीवन बेचैन और भय से भरा हुआ था। उसे परमेश्वर के सामने अपनी स्थिति का निश्चय नहीं था।इस्राएलियों के समान, उसके पास ज्ञान था, अनुशासन था, और धर्म था—परन्तु उसके हृदय में दूरी बनी हुई थी।

To be continued…

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पर्वत अब भी धुआँ उगल रहा था।गरज की आवाज़ गूँज रही थी।

आग शिखर पर छाई हुई थी।इस्राएल की प्रजा, परमेश्वर की वाणी सुनकर और उसकी भयानक महिमा देखकर, डर के मारे पीछे हट गई।उनकी स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी—दूरी।वे दूर खड़े रहे, उस पवित्रता से भयभीत होकर जिसे वे समझ नहीं पाए और उस निकटता से जिसे वे स्वीकार नहीं कर सके।परमेश्वर उन्हें खतरनाक प्रतीत हुआ—इसलिए नहीं कि वह बुरा था, पर इसलिए कि वे उसके हृदय को नहीं जानते थे।

परन्तु एक मनुष्य ने अलग प्रतिक्रिया दी।

मूसा आगे बढ़ा।जब अन्य लोग सुरक्षित दूरी की ओर हट गए, तब मूसा अनिश्चितता की ओर चला। वह उस स्थान में प्रवेश करता है जिसे पवित्रशास्त्र “घोर अन्धकार” कहता है। यह अन्धकार परमेश्वर की अनुपस्थिति नहीं था, बल्कि उसकी महिमा का परदा था—जहाँ मानवीय इन्द्रियाँ असफल होती हैं, पर विश्वास बना रहता है।

मूसा वह जानता था जो लोग नहीं जानते थे—कि जो परमेश्वर सामर्थ के साथ प्रकट होता है, वही संबंध के लिए बुलाता भी है।जिसे अन्य लोग विनाश का कारण समझते थे, मूसा उसे परिवर्तन का साधन मानता था।

  🤔 🪞 💡 यह एक ही पद एक गहरी आत्मिक सच्चाई को प्रकट करता है।वही परमेश्वर।वही समय। परन्तु दो बिल्कुल भिन्न प्रतिक्रियाएँ।

लोगों ने परमेश्वर को केवल भय के द्वारा परिभाषित किया;
मूसा ने परमेश्वर को विश्वास के द्वारा जाना, जो आज्ञाकारिता और संबंध से बना था।

मूसा पहले ही जलती हुई झाड़ी में परमेश्वर से मिल चुका था।उसने मिस्र में परमेश्वर की विश्वासयोग्यता देखी थी।
उसने यह सीख लिया था कि पवित्रता भरोसा रखने वालों को दूर नहीं करती—वह उन्हें शुद्ध करती है। मूसा जानता था कि परमेश्वर से दूरी सुरक्षा नहीं देती;
निकटता ही सच्ची सुरक्षा है।

“घोर अन्धकार” उन सब बातों का प्रतीक है जो परमेश्वर के विषय में हमारे नियंत्रण, समझ और आराम से बाहर हैं।
बहुत से लोग विश्वास की सीमा पर रुक जाते हैं क्योंकि परमेश्वर उन्हें बहुत रहस्यमय, बहुत माँग करने वाला, या बहुत पवित्र प्रतीत होता है।

मूसा हमें सिखाता है कि आत्मिक परिपक्वता रहस्य से भागना नहीं,परन्तु भरोसे के साथ उसमें प्रवेश करना है। अंतर केवल साहस का नहीं था;अंतर था—परमेश्वर के चरित्र के विषय में सही विश्वास का।मूसा जानता था कि जो परमेश्वर आज्ञा देता है, वही संगति भी करता है।

  🎬🔚 कहानी का अंत :

जब किसी ने मार्टिन लूथर की रोमियों की पत्री की भूमिका पढ़ी, तब वेस्ली ने बाद में ये प्रसिद्ध शब्द लिखे:

“मेरा हृदय अद्भुत रीति से गर्म हो उठा।”

उस क्षण में भय ने स्थान छोड़ा और निश्चय ने प्रवेश किया।

वेस्ली परमेश्वर की उपस्थिति से भागा नहीं; उसने अपने कामों पर नहीं, बल्कि परमेश्वर के अनुग्रह पर भरोसा रखते हुए निकटता चुनी। उस भेंट ने उसे एक चिंतित सेवक से एक साहसी प्रचारक में बदल दिया।उसका प्रचार इंग्लैंड भर में मेथोडिस्ट जागृति का कारण बना।

एल्डर्सगेट से पहले, वेस्ली कर्तव्य से परमेश्वर की सेवा करता था। एल्डर्सगेट के बाद, वह परमेश्वर के साथ निकटता और विश्वास के साथ चलता था।

मूसा के समान अन्धकार में प्रवेश करके,वेस्ली ने यह खोजा कि परमेश्वर के निकट आना हमें नष्ट नहीं करता— वह हमें स्वतंत्र करता है।

Source:

https://en.wikipedia.org/wiki/Aldersgate_experience

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अक्सर हम वहीं खड़े रहते हैं जहाँ लोग खड़े थे—परमेश्वर से सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए। हम उसकी आशीषों से तो प्रसन्न रहते हैं, परन्तु उसकी निकटता से सावधान। परन्तु मूसा हमें एक और मार्ग दिखाता है।

जब हम सच में परमेश्वर के हृदय को जानते हैं, तो भय हमें दूर नहीं भगाता—वह हमें और गहराई में खींच ले जाता है। हमें बुलाया गया है: ऊपरी विश्वास से पवित्र निकटता की ओर,शोर से शांति की ओर, स्पष्टता से भरोसे की ओर।जब जीवन अन्धकारमय, उलझा हुआ, या भारी प्रतीत होता है, तब हम पीछे नहीं हटते—हम निकट आते हैं।जो स्थान डरावना लगता है, वही सबसे गहरे दर्शन का स्थान हो सकता है।

मूसा के समान हम सीखते हैं कि परमेश्वर की उपस्थिति, चाहे गंभीर हो, सदैव उद्देश्यपूर्ण होती है।

परिवर्तन दूरी में नहीं—निकटता में होता है।

🙏 🕯️ प्रार्थना : हे पवित्र परमेश्वर,हमें मूसा के समान हृदय दे—ऐसे हृदय जो तब भी निकट आएँ जब अन्य पीछे हटें।जब तेरी उपस्थिति भारी लगे, तब हमें तेरे चरित्र पर भरोसा करना सिखा। हमें भय से विश्वास की ओर, दूरी से निकटता की ओर ले चल। हमें सिखा कि हम अन्धकार में भी तेरी ओर चलें, क्योंकि तू वहाँ उपस्थित है।आमीन।