जब परमेश्वर अनपेक्षित रीति से भरपूरी देता है

📖 निर्गमन 16:4–5, 7

“तब यहोवा ने मूसा से कहा, “देखो, मैं तुम लोगों के लिये आकाश से भोजन वस्तु बरसाऊँगा; और ये लोग प्रतिदिन बाहर जाकर प्रतिदिन का भोजन इकट्ठा करेंगे, इससे मैं उनकी परीक्षा करूँगा कि ये मेरी व्यवस्था पर चलेंगे कि नहीं।”
‭‭निर्गमन‬ ‭16‬:‭4‬ ‭HINOVBSI‬‬

“हम परमेश्वर पर पहले विश्वास करते हैं, तब हमारा विश्वास सबसे अधिक बढ़ता है।”

— लिडिया मर्सर

सन 2014 में चेन्नै के एक युवा पादरी डेनियल राज चेन्नई की मलिन बस्तियों (slum-ministry)  में सेवा कर रहे थे। एक शनिवार प्रातः उन्हें पता चला कि जो प्रायोजक हर सप्ताह बच्चों के लिये भोजन भिजवाता था, उसने अचानक आर्थिक कारणों से रद्द कर दिया। बाहर चालीस बच्चे भोजन की प्रतीक्षा में खड़े थे।

पादरी डेनियल के पास केवल ₹180 थे। उन्होंने प्रार्थना की,

“प्रभु, तूने जंगल में इस्राएल को खिलाया; आज इन बच्चों को भी खिला।”

वह बिस्कुट खरीदने के लिये एक छोटी किराने की दुकान पर पहुँचे।

इस्राएली लोग मिस्र से निकले कुछ ही सप्ताह हुए थे, परन्तु स्वतंत्रता का आनन्द शीघ्र ही भूख की कठिनाई में बदल गया। जंगल सूना था, दिन तपते थे, और चारों ओर उन्हें असफलता ही दिखाई देती थी। विश्वास में पुकारने के स्थान पर वे मूसा पर कुड़कुड़ाने लगे और मिस्र के भोजन को याद करने लगे—उन बन्धनों को भूलकर जिनमें वे बँधे थे।

इसी आवश्यकता और अविश्वास की घड़ी में परमेश्वर ने अद्भुत वचन दिया:

“मैं तुम्हारे लिये स्वर्ग से रोटी बरसाऊँगा।”

रोटी आकाश से नहीं गिरती, न कभी गिरी थी। परन्तु परमेश्वर ने ऐसी रीति का प्रबन्ध किया जिसकी कोई कल्पना भी न कर सकता था। फिर उसने एक परीक्षा भी दी—प्रतिदिन जितना चाहिये उतना ही चुनना, न सहेजकर रखना, न लालच करना; और छठे दिन दूना एकत्र करना, ताकि सातवें दिन विश्राम कर सकें।

और सचमुच, परमेश्वर ने वैसा ही किया।

अगली भोर रेगिस्तान की भूमि पर मन्ना पड़ा था—स्वर्ग की रोटी—कोमल, ताज़ी, प्रतिदिन की अटल दया। यह केवल भोजन न था, यह परमेश्वर की महिमा थी—दया का भार, उसकी निरंतर करुणा का प्रमाण।

परमेश्वर की व्यवस्था प्रायः उन रूपों में आती है जिन्हें हम समझ भी नहीं पाते। इस्राएल अनाज या पशु की प्रतीक्षा में थे—परन्तु परमेश्वर स्वर्ग की रोटी भेजते हैं। वे परिचित उपायों की आशा में थे—परन्तु वह बिल्कुल नयी रीति से प्रदान करता है।

हम भी प्रायः परमेश्वर को केवल उन्हीं मार्गों में खोजते हैं जिन्हें हम पहले से जानते हैं:
• वही नौकरी जो उचित लगे,
• वही पहचान जो पहले से बनी हो,
• वही समाधान जो तर्कसंगत लगे।

परन्तु परमेश्वर हमारे अनुभव तक सीमित नहीं है।
वह ऐसी राहें खोलता है जो अभी बनी भी नहीं होतीं—ऐसे अवसर देता है जिनकी दृष्टि हमें नहीं होती।

मन्ना हमें सिखाता है कि परमेश्वर की उत्तम आशीषें आज्ञाकारिता के साथ आती हैं।
वह रोटी बरसाता है—परन्तु चुनना हमें है।
वह अनुग्रह भेजता है—परन्तु भरोसा करना हमारा भाग है।

इस्राएल ने प्रभु की महिमा को बिजली और बादलों में नहीं, बल्कि शांत, प्रतिदिन की दया में देखा। आज भी वही परमेश्वर ऐसा ही करता है।

कहानी का अन्त:

पंक्ति (क़तार) में खड़े-खड़े किसी ने उनके कंधे पर हाथ रखा—

“पादरी डेनियल?” डेनियल ने आश्चर्य से ‘हाँ’ कहा; वे उस व्यक्ति को जानते भी न थे।

वह बोला, “परमेश्वर ने आज भोर में ही मुझे आपकी सेवा को आशीष देने को कहा,” और एक लिफ़ाफ़ा उनके हाथ में दे दिया। भीतर ₹4,000 थे—सभी बच्चों के लिये पूरा भोजन कराने को पर्याप्त, और कुछ अतिरिक्त भी।

बाद में पता चला कि वह व्यक्ति उस क्षेत्र का निवासी भी न था; गाड़ी चलाते समय वह रास्ता भटक गया था और उसी दुकान पर पहुँचा था। उसने कहा,

“परमेश्वर ने मेरे मार्ग को मोड़ दिया।”

उस दिन बच्चों ने पूरा भोजन किया, और डेनियल का विश्वास बढ़ा।

उन्होंने कहा, “मैं बिस्कुट माँग रहा था; परमेश्वर ने बिरयानी दे दी। वह हमेशा अप्रत्याशित रीति से देता है।”

जैसे इस्राएल ने, वैसे ही डेनियल ने भी प्रभु की महिमा को शांत, चमत्कारिक दया में देखा।

परमेश्वर के लोगों के रूप में हमें अपने हृदय को यह सिखाना है कि उत्तर आने से पहले ही उस पर विश्वास रखें।

• हम उजाड़ भूमि को देखकर भी नये मन्ना की अपेक्षा करें।

• हम आज्ञाकारिता चुनें, भले उसकी व्यवस्था अनोखी क्यों न लगे।

• हम आज के लिये दिया मन्ना ग्रहण करें, कल की चिन्ता बिना।

• हम विश्राम करना सीखें—क्योंकि परमेश्वर कभी चूकता नहीं।

जैसे इस्राएल ने प्रतिदिन की रोटी में उसकी महिमा देखी, वैसे ही हम भी प्रतिदिन परमेश्वर की महिमा देखेंगे।

🙏 प्रार्थना:

हे पिता, धन्यवाद कि तू वह परमेश्वर है जो हमारी समझ से परे रीति से व्यवस्था करता है। हमें सिखा कि उत्तर दिखने से पहले ही तेरे ऊपर भरोसा करें, और प्रतिदिन तेरी दी हुई कृपा को आज्ञाकारिता से ग्रहण करें। हर छोटी-बड़ी व्यवस्था में हम तेरी महिमा देखें। हमारा विश्वास दृढ़ कर, और हमें तेरे अटल स्वभाव पर टिकाए रख। यीशु के नाम में, आमीन।


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