निर्गमन 14:23–28
“तब मूसा ने समुद्र के ऊपर अपना हाथ बढ़ाया, और भोर होते ही समुद्र अपनी जगह पर लौट आया; और मिस्री उसके साम्हने भागे जा रहे थे, तब यहोवा ने उन्हें समुद्र के बीच में उलट दिया।” — निर्गमन 14:27
“परमेश्वर कभी देर नहीं करता अपने दासों के लिए न्याय करने में — वह ठीक समय पर कार्य करता है।”
-चार्ल्स स्पर्जन
सन 1877 में, मिशनरी जॉर्ज म्यूलर इंग्लैंड से क्यूबेक की ओर जहाज़ से जा रहे थे। यात्रा के बीच गहरा कोहरा छा गया, जिससे जहाज़ का समय पर पहुँचना असंभव लग रहा था। कप्तान ने म्यूलर से कहा कि अब वे देर से पहुँचेंगे। म्यूलर ने शांत भाव से उत्तर दिया, “मेरा ध्यान कोहरे पर नहीं, उस परमेश्वर पर है जो उसे नियंत्रित करता है।”
इस्राएली भी ऐसी ही स्थिति में फँसे थे — पीछे फ़िरौन की सेना गर्जन करती चली आ रही थी, और आगे अनंत फैलता हुआ लाल समुद्र था। भय ने सबको घेर लिया। लोगों ने मूसा पर दोष लगाया, भूल गए कि वह केवल परमेश्वर की आज्ञा का पालन कर रहा था। मूसा के पास अपनी कोई शक्ति नहीं थी — केवल उस परमेश्वर पर विश्वास था जिसने उसे भेजा था।
फिर यहोवा ने कहा, “अपना हाथ समुद्र के ऊपर बढ़ा।” मूसा ने आज्ञा मानी, और जल दो भागों में विभाजित हो गया। इस्राएल की प्रजा सूखी भूमि पर से पार हो गई। जब फ़िरौन की रथ-सेना पीछा करने लगी, तो स्वयं परमेश्वर ने उन्हें उलझन में डाल दिया, उनके रथों के पहिए फँसा दिए और उनके हृदयों में भय भर दिया। फिर यहोवा ने फिर कहा, “अपना हाथ समुद्र के ऊपर बढ़ा।” जब मूसा ने ऐसा किया, तो समुद्र लौट आया और पूरी मिस्री सेना उसमें डूब गई।
वह क्षण केवल मुक्ति का नहीं था, बल्कि दिव्य न्याय और प्रमाण का भी था। वही परमेश्वर जिसने मूसा को बुलाया था, अब उसके द्वारा अपनी शक्ति प्रकट कर रहा था। जो लोग पहले मूसा पर संदेह करते थे, अब सबने देखा कि परमेश्वर स्वयं उसके साथ है।

परमेश्वर अपने दासों का न्याय करता है। मूसा ने अपने विरोधियों से वाद-विवाद नहीं किया; उसने केवल आज्ञा का पालन किया। और उचित समय पर, यहोवा ने अपनी शक्ति से यह सिद्ध कर दिया कि वह अपने दास के साथ है। जब परमेश्वर तुम्हारे लिए लड़ता है, तो वह न केवल शत्रुओं को पराजित करता है, बल्कि यह भी प्रकट करता है कि उसका हाथ तुम्हारे जीवन पर है।
न्याय या “विंडिकेशन” का अर्थ स्वयं को सिद्ध करना नहीं, बल्कि यह है कि परमेश्वर स्वयं अपने दास के जीवन के माध्यम से अपनी सच्चाई प्रकट करे। जब तुम विश्वास में दृढ़ रहते हो, तब परमेश्वर की महिमा किसी भी आरोप या विरोध से अधिक प्रबल होकर बोलती है।
कहानी का अंत:
म्यूलर ने जहाज़ के कप्तान के साथ प्रार्थना की कि कोहरा हट जाए। कुछ ही क्षणों में कोहरा पूरी तरह छँट गया। कप्तान आश्चर्यचकित रह गया। म्यूलर मुस्कराए और बोले, “कप्तान, परमेश्वर ने पहले ही उत्तर दे दिया है।”
इस घटना ने म्यूलर के दृढ़ विश्वास को सबके सामने सिद्ध किया। जैसे लाल समुद्र के पार मूसा की आज्ञाकारिता सिद्ध हुई, वैसे ही परमेश्वर ने म्यूलर के विश्वास को सार्वजनिक रूप से प्रमाणित किया।

जीवन में ऐसे क्षण आएँगे जब परमेश्वर की आज्ञा का पालन करने पर लोग तुम्हें गलत समझेंगे, प्रश्न करेंगे या आलोचना करेंगे। परन्तु याद रखो—परमेश्वर का न्याय अपने समय और अपनी रीति से अवश्य आता है। तुम्हें स्वयं को सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं, केवल वह करते रहो जो उसने तुम्हें कहा है।
जब तुम शांत विश्वास और स्थिर आज्ञाकारिता में चलते हो, तब परमेश्वर स्वयं तुम्हारे पक्ष में बोलेगा। उसका सामर्थ्य तुम्हारे शब्दों से कहीं अधिक प्रभावी ढंग से यह सिद्ध करेगा कि वह तुम्हारे साथ है।
प्रार्थना:
“हे प्रभु, जब लोग मुझे गलत समझें, तब मुझे तुझ पर विश्वास बनाए रखने में सहायता कर। मेरे लिए लड़, मेरा न्याय कर, और अपने सामर्थ्य से यह दिखा कि मैं तेरा हूँ। आमीन।”


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