जब परमेश्वर बीच में खड़ा होता है ।

निर्गमन 14:19–20
“तब परमेश्वर का दूत, जो इस्राएल की छावनी के आगे-आगे चलता था, हटकर उनके पीछे चला गया; और बादल का खंभा भी उनके आगे से हटकर उनके पीछे खड़ा हो गया। इस प्रकार वह मिस्रियों की छावनी और इस्राएल की छावनी के बीच में आ गया; और एक के लिये वह बादल और अंधियारा था, पर दूसरे के लिये उसने रातभर उजियाला किया; और वे सारी रात एक दूसरे के समीप न आ सके।”

“अज्ञात भविष्य के विषय में उस परमेश्वर पर भरोसा करने से मत डर जिसे तू जानता है।”

— कोरी टेन बूम

द्वितीय विश्वयुद्ध के समय (1944 में), कोरी टेन बूम और उनके परिवार ने नीदरलैंड के हारलेम नगर में अपने घर में यहूदी शरणार्थियों को छिपा रखा था।जब नाज़ियों को यह रहस्य पता चला, तब कोरी और उनकी बहन बैट्सी को पकड़कर रैवेनसब्रुक कैम्प ( Ravensbrück concentration camp) भेज दिया गया।

मिस्र से दासत्व से मुक्त होने के बाद इस्राएली मूसा के पीछे-पीछे लाल समुद्र की ओर बढ़े।पर शीघ्र ही वे फँस गए — सामने समुद्र और पीछे फ़िरौन की शक्तिशाली सेना।भय ने उनके हृदयों को भर दिया।परंतु ठीक उसी समय परमेश्वर का दूत, जो पहले उनके आगे-आगे चल रहा था, अब उनके पीछे चला गया।बादल का स्तंभ मिस्रियों और इस्राएलियों के बीच आ खड़ा हुआ।मिस्रियों के लिए वह घोर अंधकार बन गया, पर इस्राएलियों के लिए वह रातभर उजियाला करता रहा।जब वे अभी तक उस चमत्कार को नहीं देख पा रहे थे जो आगे होने वाला था, तब भी परमेश्वर पहले से उनके लिये कार्य कर रहा था —वह शत्रु को रोक रहा था, अपने लोगों की रक्षा कर रहा था, और असंभव मार्ग को संभव बना रहा था।

परमेश्वर केवल अपने लोगों का नेतृत्व ही नहीं करता — वह अदृश्य स्थानों में उनकी रक्षा भी करता है।जब आगे का मार्ग दिखाई नहीं देता, तब सम्भव है कि वह तुम्हारे पीछे खड़ा होकर तुम्हें उस हानि से बचा रहा हो जिसे तुम नहीं देख पाते।जो उपस्थिति परमेश्वर के विरोधियों के लिये अंधकार सी लगती है, वही उसके विश्वासियों के लिये प्रकाश और सुरक्षा बन जाती है।

कहानी का अंत :

एक रात, कैम्प में बैट्सी ने कोरी से धीरे से कहा,“यहाँ भी परमेश्वर हमारा शरणस्थान है।”बाद में कोरी को पता चला कि उनके बैरक की कभी तलाशी नहीं ली गई क्योंकि वहाँ जूँओं (lice) का प्रकोप था।जो बात एक श्राप जैसी प्रतीत होती थी, वही परमेश्वर की सुरक्षा का साधन बन गई।जिस प्रकार मिस्रियों के लिए बादल अंधकार था और इस्राएल के लिए उजियाला, उसी प्रकार परमेश्वर की रक्षा अक्सर उन बातों में छिपी होती है जिनकी हम कम से कम अपेक्षा करते हैं।

जब जीवन की परिस्थितियाँ मुझे कोने में धकेल देती हैं, और न आगे बढ़ने का मार्ग दिखता है न बचाव का उपाय,तब मैं स्मरण रखूँगा कि परमेश्वर मेरे और संकट के बीच में खड़ा है।

मैं घबराने के स्थान पर यह विश्वास करूँगा कि उसका उपस्थित होना ही मेरी रक्षा है —भले ही मैं उसे देख न सकूँ।कभी-कभी जो विलंब प्रतीत होता है, वही परमेश्वर की दिव्य सुरक्षा होती है।

प्रार्थना:

“हे प्रभु, धन्यवाद कि तू मेरे और उन बातों के बीच में खड़ा रहता है जो मुझे हानि पहुँचाना चाहती हैं।जब मैं तेरे हाथ को नहीं देख पाता, तब भी मुझे तेरी उपस्थिति पर भरोसा रखना सिखा।अंधकार में मेरा प्रकाश बन, और संघर्ष में मेरी ढाल।आमीन।”