Tag: यीशुप्रेम
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जब न्याय मुक्त करता है: परमेश्वर की व्यवस्था जो मानवीय गरिमा को बहाल करती है
Read more: जब न्याय मुक्त करता है: परमेश्वर की व्यवस्था जो मानवीय गरिमा को बहाल करती है“परमेश्वर का न्याय चोट को स्वतंत्रता में बदल देता है।”
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चंगाई देने वाला न्याय: मानव हानि पर परमेश्वर की संतुलित प्रतिक्रिया
Read more: चंगाई देने वाला न्याय: मानव हानि पर परमेश्वर की संतुलित प्रतिक्रिया“परमेश्वर का न्याय बदला नहीं, बल्कि जीवन की रक्षा करता है।”
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स्वतंत्रता का विरोधाभास: वह दास जो स्वेच्छा से अपनापन चुनता है
Read more: स्वतंत्रता का विरोधाभास: वह दास जो स्वेच्छा से अपनापन चुनता हैसच्ची स्वतंत्रता मसीह से प्रेमपूर्ण अपनापन चुनने में है।
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दस आज्ञाएँ-जब इच्छा अत्याचारी बन जाए: परमेश्वर के सामने पवित्र संतोष सीखना
Read more: दस आज्ञाएँ-जब इच्छा अत्याचारी बन जाए: परमेश्वर के सामने पवित्र संतोष सीखनासंतोष चुनो; परमेश्वर पर्याप्त है, लालच आत्मा को बाँधता है।
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दस आज्ञाएँ – चोरी न करना : परमेश्वर और मनुष्यों के सामने सत्यनिष्ठ जीवन
Read more: दस आज्ञाएँ – चोरी न करना : परमेश्वर और मनुष्यों के सामने सत्यनिष्ठ जीवन“परमेश्वर पर भरोसा सत्यनिष्ठ जीवन और उदारता की जड़ है।”
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दस आज्ञाएँ – अपने माता-पिता का आदर करो: परमेश्वर की आशीष और स्थिर जीवन का मार्ग
Read more: दस आज्ञाएँ – अपने माता-पिता का आदर करो: परमेश्वर की आशीष और स्थिर जीवन का मार्ग“माता-पिता का आदर करना परमेश्वर की आशीष का मार्ग है।”
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दस आज्ञाएँ — सब्त दिन को स्मरण रखना – देह, प्राण और विश्वास के लिये परमेश्वर का विश्राम का वरदान
Read more: दस आज्ञाएँ — सब्त दिन को स्मरण रखना – देह, प्राण और विश्वास के लिये परमेश्वर का विश्राम का वरदान“मसीह में विश्राम, विश्वास की लय, स्वतंत्र जीवन की पहचान।”
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दस आज्ञाएँ — परमेश्वर के नाम का आदर करो, श्रद्धा से बोलने वाला और आज्ञाकारी जीवन का विश्वास
Read more: दस आज्ञाएँ — परमेश्वर के नाम का आदर करो, श्रद्धा से बोलने वाला और आज्ञाकारी जीवन का विश्वास“श्रद्धा से बोला नाम, आज्ञाकारी जीवन में प्रकट विश्वास।”
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दस आज्ञाएँ — परमेश्वर की उपासना, मूर्तियों की नहीं , एक ऐसा हृदय जो मूर्तियों से आकार न पाए
Read more: दस आज्ञाएँ — परमेश्वर की उपासना, मूर्तियों की नहीं , एक ऐसा हृदय जो मूर्तियों से आकार न पाए“अदृश्य परमेश्वर की उपासना, मूर्तियों से मुक्त अविभाजित हृदय।”
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दस आज्ञाएँ – केवल एक ही परमेश्वर, जिसके सामने हम खड़े हैं
Read more: दस आज्ञाएँ – केवल एक ही परमेश्वर, जिसके सामने हम खड़े हैं“एक परमेश्वर, एक हृदय, एक जीवन — सम्पूर्ण समर्पण।”
