आज का वचन | October 28, 2026

🎯 विषय: आत्मिक उन्नति : 📖 1 तीमुथियुस 4:15

📖 पवित्रशास्त्र :

“इन बातों को सोचते रह और इन्हीं में अपना ध्यान लगाए रह, ताकि तेरी उन्नति सब पर प्रगट हो।”
‭‭1 तीमुथियुस‬ ‭4‬:‭15‬ ‭‬‬

💡 मनन:

आत्मिक उन्नति अपने आप नहीं होती। इसके लिए परमेश्वर के वचन, प्रार्थना और आज्ञाकारिता में निरन्तर बने रहना आवश्यक है। जैसे पौलुस ने तीमुथियुस को अपने बुलावे और सेवा में लगे रहने के लिए प्रोत्साहित किया, वैसे ही हमें भी विश्वासयोग्यता से आगे बढ़ना चाहिए। जब हम प्रभु के साथ समय बिताते हैं, तो उसका कार्य हमारे जीवन में दिखाई देने लगता है। धीरे-धीरे होने वाली आत्मिक वृद्धि भी परमेश्वर को प्रसन्न करती है।

🙏 प्रार्थना:

हे स्वर्गीय पिता, मुझे आत्मिक रूप से बढ़ने में सहायता दे। तेरे वचन के प्रति भूख और तेरी इच्छा को मानने वाला हृदय प्रदान कर, ताकि मेरा जीवन तुझे महिमा दे सके। यीशु के नाम में, आमीन।