🎯 विषय: मित्रता : 📖 नीतिवचन 16:28
📖 पवित्रशास्त्र :
💡 मनन:
मित्रता परमेश्वर की एक सुंदर देन है, जिसे सावधानी और बुद्धि से संभालना चाहिए। नीतिवचन 16:28 हमें चेतावनी देता है कि गलत शब्द और झगड़े करीबी मित्रों को भी अलग कर सकते हैं। इसलिए हमें ऐसे व्यक्ति बनना चाहिए जो शांति बढ़ाएँ और विश्वास बनाए रखें। जब हमारे शब्द प्रेम, सम्मान और समझ से भरे होते हैं, तब हमारी मित्रता मजबूत होती है और हम मसीह के प्रेम को प्रकट करते हैं।
🙏 प्रार्थना:
हे स्वर्गीय पिता, मुझे ऐसा मित्र बना जो विश्वासयोग्य, प्रेमपूर्ण और शांतिदूत हो। मेरे शब्दों की रक्षा कर और मेरे संबंधों में तेरी बुद्धि प्रकट हो। यीशु के नाम में, आमीन।

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