आज का वचन | October 17, 2026

🎯 विषय: नम्रता : 📖 रोमियों 12:3

📖 पवित्रशास्त्र :

“क्योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूँ कि जैसा समझना चाहिए उससे बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे; पर जैसा परमेश्‍वर ने हर एक को विश्‍वास परिमाण के अनुसार बाँट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे।”
‭‭रोमियों‬ ‭12‬:‭3‬ ‭

💡 मनन:

नम्रता का आरंभ तब होता है जब हम स्वयं को परमेश्वर की दृष्टि से देखते हैं। रोमियों 12:3 हमें सिखाता है कि अपने विषय में आवश्यकता से अधिक ऊँचा विचार न रखें। सच्ची नम्रता स्वयं को कम समझना नहीं है, बल्कि यह पहचानना है कि हमारी हर क्षमता, अवसर और आशीष परमेश्वर से आती है। जब हम नम्रता से चलते हैं, तब हम दूसरों की बेहतर सेवा कर पाते हैं और परमेश्वर को महिमा देते हैं।

🙏 प्रार्थना:

हे स्वर्गीय पिता, मुझे नम्रता के मार्ग पर चलना सिखाइए। मेरी सहायता करें कि मैं आपकी अनुग्रह पर निर्भर रहूँ, दूसरों की प्रेम से सेवा करूँ और हर बात में आपकी महिमा करूँ। यीशु के नाम में, आमीन।