दसवीं विपत्ति – पहलौठों की मृत्यु

निर्गमन 11:7 
“परन्तु इस्राएलियों के किसी जन पर, चाहे वह मनुष्य हो या पशु, कुत्ता भी अपनी जीभ न हिलाएगा; इस से तुम जान लोगे कि यहोवा ने मिस्रियों और इस्राएलियों में अन्तर किया है।”

आनेवाली बड़ी विपत्ति के बावजूद, परमेश्वर ने मिस्रियों को यह देखने का अवसर दिया कि दोष मूसा या इस्राएलियों का नहीं, बल्कि उनके अपने फ़िरौन का था।

मिस्रियों ने इस्राएल को रुलाया था; और परमेश्वर प्रायः प्रतिफल देता है—

• लूट के बदले लूट (यहेजकेल 39:10)

• संख्या के बदले संख्या (यशायाह 65:11,12)

• चुनाव के बदले चुनाव (यशायाह 66:3,4)

• रोने के बदले रोना (याकूब 5:1,4)

चार्ल्स स्पर्जन ने कहा:

“यहोवा ने अपने लोगों और जो उसके नहीं हैं, उनके बीच अन्तर रखा है। मनुष्यों के बीच बहुत से भेद हैं जो एक दिन मिट जाएंगे; परन्तु यह अन्तर अनन्त है।”

अनन्त अन्तर

निर्गमन 11:7 – “यहोवा ने अपने लोगों और सब अन्य में अन्तर किया है।”

1. परमेश्वर स्वयं अन्तर करता है

• धन, जाति या मनुष्य के गुणों के आधार पर नहीं, बल्कि उसकी वाचा और अनुग्रह से (मलाकी 3:18)।

• हम उसके लोग बनते हैं मसीह में विश्वास के द्वारा (यूहन्ना 10:27)।

2. परमेश्वर के लोग अलग जीवन जीते हैं

• अन्धकार से बुलाकर उसकी अद्भुत ज्योति में लाए गए (1 पतरस 2:9)।

• हमारा आचरण, प्रेम और पवित्रता दिखाती है कि हम उसके हैं (2 कुरिन्थियों 6:17)।

3. यह अन्तर अनन्त तक रहता है

• सब सांसारिक भेद मिट जाएंगे, पर उद्धार पाए और न पाए का अन्तर सदा रहेगा (मत्ती 25:46)।

• आज ही परमेश्वर की बुलाहट का उत्तर देने का समय है (यशायाह 55:6)।

प्रार्थना:

हे प्रभु, धन्यवाद कि तूने मुझे अपनी प्रजा में गिना। मुझे ऐसा जीवन जीने में सहायता कर जो तेरी ज्योति को प्रकट करे। मुझे सदा स्मरण रहे कि यह अन्तर अनन्त है, और मैं तेरे अनुग्रह में स्थिर रहूँ। आमीन।