Tag: आत्मिकवृद्धि
-

सबसे बड़ी आज्ञा: पूरे मन से परमेश्वर से प्रेम करना
Read more: सबसे बड़ी आज्ञा: पूरे मन से परमेश्वर से प्रेम करनापरमेश्वर से पूर्ण प्रेम करो और मनुष्यों से सच्चा प्रेम।
-

रिचर्ड वुर्मब्रांड का विश्वास और सताव – रोमानिया 1948
Read more: रिचर्ड वुर्मब्रांड का विश्वास और सताव – रोमानिया 1948सताव में भी विश्वासयोग्यता परमेश्वर की सामर्थ और महिमा प्रकट करती है ।
-

अस्वीकार किया गया पुत्र: दाख की बारी के दृष्टान्त का अर्थ
Read more: अस्वीकार किया गया पुत्र: दाख की बारी के दृष्टान्त का अर्थपरमेश्वर के पुत्र को स्वीकार करने से अनन्त जीवन का मार्ग खुलता है ।
-

सी. टी. स्टड का मसीह के प्रति समर्पण – इंग्लैंड, 1885
Read more: सी. टी. स्टड का मसीह के प्रति समर्पण – इंग्लैंड, 1885सच्चा समर्पण साधारण जीवन को अनन्त प्रभाव से भर देता है।
-

जब यीशु के अधिकार पर प्रश्न उठे: हमारे जीवन पर वास्तव में कौन राज्य करता है?
Read more: जब यीशु के अधिकार पर प्रश्न उठे: हमारे जीवन पर वास्तव में कौन राज्य करता है?नम्र हृदय यीशु का अधिकार पहचानते, घमंडी हृदय उसे अस्वीकार करते है ।
-

पत्ते बिना फल? सच्चे विश्वास की जड़ें
Read more: पत्ते बिना फल? सच्चे विश्वास की जड़ेंसिर्फ़ पत्ते नहीं—जड़ें ठीक हों तो सच्चा फल है।
-

वेल्स के सराय-मालिक का परिवर्तन – वेल्श जागृति (1904)
Read more: वेल्स के सराय-मालिक का परिवर्तन – वेल्श जागृति (1904)परमेश्वर पश्चातापी हृदय बदलकर पाप स्थानों को प्रार्थना घर बनाता है ।
-

रोते हुए राजा: यीशु का यरूशलेम पर विलाप
Read more: रोते हुए राजा: यीशु का यरूशलेम पर विलापयीशु रोए क्योंकि नगर ने परमेश्वर की शांति स्वीकार नहीं की
-

चार्ल्स फिन्नी के आँसुओं से रोचेस्टर में जागृति (1830)
Read more: चार्ल्स फिन्नी के आँसुओं से रोचेस्टर में जागृति (1830)एक सेवक की प्रार्थनाओं से नगर में आत्मिक जागृति आई
-

हैले सेलासी का निर्वासन (1936): एक सम्राट जिसने मसीह पर भरोसा किया
Read more: हैले सेलासी का निर्वासन (1936): एक सम्राट जिसने मसीह पर भरोसा कियानिर्वासन में सम्राट ने सीखा सच्ची शक्ति केवल मसीह में
